HRA छूट कैलकुलेटर

जानिए आपके हाउस रेंट अलाउंस (मकान किराया भत्ता) का कितना हिस्सा टैक्स-फ़्री है और कितने पर टैक्स लगेगा। अपना Basic वेतन + DA, सैलरी में मिलने वाला HRA और आपके द्वारा चुकाया गया किराया दर्ज करें — कैलकुलेटर तीनों सीमाएँ साथ-साथ दिखाता है, ताकि आप ठीक-ठीक देख सकें कि कौन-सी सीमा आपकी छूट को रोक रही है।

HRA के लिए सिर्फ़ चार शहर मेट्रो गिने जाते हैं: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई। बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, गुरुग्राम, नोएडा और बाक़ी हर जगह 40% लगता है, चाहे वहाँ किराया कितना भी ऊँचा हो। यह वह सूची नहीं है जिससे आपका नियोक्ता तय कर सकता है कि आपको कितना HRA दिया जाए।

अगर आप बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे या अहमदाबाद में किराये पर रहते हैं, तो एक बदलाव पर नज़र रखें। आयकर नियमावली, 2026 का मसौदा नियम 279 इन चार शहरों को 1 अप्रैल 2026 से कमाई गई आय के लिए 50% वाली सूची में जोड़ने का प्रस्ताव करता है। हम यह पुष्टि नहीं कर पाए हैं कि अंतिम अधिसूचना जारी हो चुकी है, इसलिए यह कैलकुलेटर अभी भी इन पर 40% ही लगाता है — जो ज़्यादा सुरक्षित आँकड़ा है। अगर आप इन चार में से किसी शहर में रहते हैं और 1 अप्रैल 2026 या उसके बाद शुरू होने वाले साल का हिसाब लगा रहे हैं, तो ऊपर के आँकड़े पर भरोसा करने से पहले मौजूदा स्थिति जाँच लें।

छूट वाला HRA (टैक्स-फ़्री)
₹1,80,000
टैक्स योग्य HRA
₹60,000

यही आँकड़ा क्यों — तीन सीमाएँ

सीमा A
वास्तव में मिला HRA
₹2,40,000
साल भर में आपकी सैलरी का HRA
सीमा B
चुकाया गया किराया − वेतन का 10%
₹1,80,000
₹2,40,000 − ₹60,000
सबसे छोटी — यही आपकी छूट है
सीमा C
वेतन का 50% (मेट्रो)
₹3,00,000
50% × ₹6,00,000

छूट वाला HRA = ₹2,40,000, ₹1,80,000 और ₹3,00,000 में से सबसे छोटी राशि = ₹1,80,000

इस्तेमाल हुए सालाना आँकड़े: वेतन ₹6,00,000 · HRA ₹2,40,000 · किराया ₹2,40,000

सिर्फ़ पुरानी टैक्स व्यवस्था में। नई टैक्स व्यवस्था में HRA छूट क्लेम नहीं की जा सकती, और नई व्यवस्था ही डिफ़ॉल्ट है। ऊपर दिखाई गई छूट का इस्तेमाल करने के लिए आपको उस साल के लिए पुरानी व्यवस्था चुननी होगी।

यह योजना बनाने में मदद के लिए एक अनुमान है। आप असल में कितना क्लेम कर सकते हैं, यह आपके नियोक्ता की Form 16 गणना और आपके टैक्स सलाहकार के आँकड़े तय करते हैं। यहाँ सब कुछ आपके अपने डिवाइस पर चलता है — आपकी सैलरी की जानकारी कभी आपके फ़ोन या कंप्यूटर से बाहर नहीं जाती।

एक हल किया हुआ उदाहरण, पूरे हिसाब के साथ

प्रिया मुंबई में काम करती हैं। उनका Basic वेतन + DA साल भर में ₹6,00,000 है (₹50,000 महीना), नियोक्ता उन्हें ₹2,40,000 HRA देता है, और वे ₹2,40,000 किराया चुकाती हैं। तीनों सीमाएँ इस तरह निकलती हैं:

  • सीमा A — वास्तव में मिला HRA: ₹2,40,000।
  • सीमा B — चुकाया गया किराया घटा वेतन का 10%: ₹2,40,000 − ₹60,000 = ₹1,80,000।
  • सीमा C — वेतन का 50%, क्योंकि मुंबई मेट्रो है: 50% × ₹6,00,000 = ₹3,00,000।

तीनों में सबसे छोटी राशि ₹1,80,000 है, और यही उनका छूट वाला HRA है। उन्हें मिले HRA का बाक़ी हिस्सा — ₹2,40,000 − ₹1,80,000 = ₹60,000 — उनकी टैक्स योग्य सैलरी में जुड़ जाता है।

देखिए असल में उनका जवाब किस चीज़ से तय हो रहा है। काम सीमा B कर रही है, क्योंकि उनके किराये में से वेतन का 10% घटाने पर बची राशि तीनों सीमाओं में सबसे छोटी है। हर महीने ₹1,000 ज़्यादा किराया देने से उनकी छूट साल में ₹12,000 बढ़ जाएगी; किराया बदले बिना वेतन बढ़ने पर छूट घट जाएगी, क्योंकि वेतन का 10% बढ़ जाता है। सीमा C उनके आसपास भी नहीं आती, इसलिए इन आँकड़ों पर उनके शहर से कोई फ़र्क नहीं पड़ता: नॉन-मेट्रो मानकर देखें तो भी उनकी छूट ₹1,80,000 है — यानी ₹0 का अंतर।

मेट्रो या नहीं: शहर से आपका जवाब कब सच में बदलता है

प्रिया के आँकड़ों पर मेट्रो वाले विकल्प से कुछ नहीं बदला। इसका असर तभी पड़ता है जब तीनों में सीमा C सबसे छोटी हो — यानी जब आपका किराया आपके वेतन की तुलना में ऊँचा हो। यहाँ एक जैसे इनपुट दोनों तरह से चलाए गए हैं: वेतन ₹6,00,000, मिला हुआ HRA ₹4,00,000, चुकाया गया किराया ₹4,80,000।

शहरसीमा Aसीमा Bसीमा Cछूटटैक्स योग्य
मेट्रो (50%) ₹4,00,000 ₹4,20,000 ₹3,00,000 ₹3,00,000 ₹1,00,000
नॉन-मेट्रो (40%) ₹4,00,000 ₹4,20,000 ₹2,40,000 ₹2,40,000 ₹1,60,000

वही वेतन, वही किराया, वही HRA — मेट्रो में ₹60,000 ज़्यादा छूट, क्योंकि दोनों पंक्तियों में सीमा C ही सबसे छोटी है और वेतन का 50%, 40% से बड़ा होता है।

तो व्यावहारिक नियम यह है: अगर सीमा B या सीमा A आपकी सबसे छोटी राशि है, तो पुणे की जगह दिल्ली में होने से कुछ भी नहीं बदलता। अगर सीमा C आपकी सबसे छोटी राशि है, तो यहाँ शहर की क़ीमत आपके लिए ₹60,000 है।

इस गणना में "वेतन" में क्या-क्या गिना जाता है

यहाँ वेतन शब्द का अर्थ सीमित है, और ग़लत आँकड़ा लेना मेट्रो सूची के बाद दूसरी सबसे आम ग़लती है। HRA के लिए इसका मतलब है:

  • Basic वेतन — आपकी सैलरी का Basic हिस्सा, न कि आपका CTC और न ही इन-हैंड सैलरी।
  • महँगाई भत्ता (DA), पर सिर्फ़ वह हिस्सा जो आपकी नौकरी की शर्तों के तहत रिटायरमेंट लाभों में गिना जाता है। कई निजी नियोक्ता DA देते ही नहीं।
  • कमीशन, पर सिर्फ़ तब जब वह आपके द्वारा हासिल टर्नओवर का तय प्रतिशत हो।

बाक़ी सब बाहर रहता है: बोनस, ओवरटाइम, परफ़ॉर्मेंस पे, कन्वेयंस अलाउंस, LTA, मेडिकल रीइम्बर्समेंट, नियोक्ता का PF योगदान और ख़ुद HRA भी। अगर आपकी सैलरी स्लिप में बड़ा "स्पेशल अलाउंस" दिखता है, तो वह भी इस नियम के लिए वेतन का हिस्सा नहीं है — इसीलिए एक जैसे CTC वाले दो लोगों की HRA छूट बहुत अलग-अलग हो सकती है।

एक और बात जानने लायक है: गणना उस अवधि के लिए होती है जिसमें किराये का घर आपके पास रहा। अगर साल के बीच आपका वेतन, किराया या शहर बदला, तो हर बदलाव पर साल को बाँटें, हर हिस्से पर जाँच चलाएँ, और छूट वाली राशियाँ जोड़ लें।

एक नज़र में छूट वाला HRA — वेतन बनाम किराया, मेट्रो

नीचे का हर आँकड़ा उसी नियम से निकाला गया है जिससे कैलकुलेटर चलता है। इसमें माना गया है कि HRA वेतन के 50% पर दिया जाता है, जो मेट्रो में आम सैलरी स्ट्रक्चर है, और आप दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या चेन्नई में किराये पर रहते हैं। सभी राशियाँ पूरे साल की हैं।

वेतन (Basic + DA) किराया ₹1,20,000किराया ₹2,40,000किराया ₹3,60,000किराया ₹6,00,000किराया ₹9,00,000
₹3,00,000 ₹90,000₹1,50,000₹1,50,000₹1,50,000₹1,50,000
₹6,00,000 ₹60,000₹1,80,000₹3,00,000₹3,00,000₹3,00,000
₹9,00,000 ₹30,000₹1,50,000₹2,70,000₹4,50,000₹4,50,000
₹12,00,000 ₹0₹1,20,000₹2,40,000₹4,80,000₹6,00,000
₹18,00,000 ₹0₹60,000₹1,80,000₹4,20,000₹7,20,000

किसी पंक्ति को बाएँ से दाएँ पढ़ें तो पैटर्न ख़ुद दिख जाता है: किराया बढ़ने के साथ छूट बढ़ती है, जब तक वह वेतन के 50% वाली सीमा तक नहीं पहुँच जाती — उसके बाद ज़्यादा किराया देने से ज़्यादा छूट नहीं मिलती। इसके बजाय ₹1,20,000 वाले कॉलम को ऊपर से नीचे पढ़ें तो छूट शून्य तक गिर जाती है: जैसे ही वेतन का 10% आपके किराये से ज़्यादा होता है, सीमा B शून्य हो जाती है और कोई HRA छूट-प्राप्त नहीं रहता।

यह किस क़ानून में लिखा है

यह छूट आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(13A) में है, जिसे आयकर नियमावली, 1962 के नियम 2A के साथ पढ़ा जाता है। ज़्यादातर लोग अभी जो रिटर्न भर रहे हैं — 31 मार्च 2026 तक की आय, निर्धारण वर्ष 2026-27 — उस पर यही क़ानून लागू होता है।

आयकर अधिनियम, 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ और वही राहत आगे ले जाता है, नई संख्या अनुसूची III, तालिका क्रम सं. 11 के साथ। नई संख्या से सिर्फ़ यह बदलता है कि नियम कहाँ लिखा है, यह नहीं कि वह क्या करता है: छूट अब भी वास्तविक HRA, वेतन के 10% से ऊपर चुकाया गया किराया, और आप कहाँ रहते हैं उसके हिसाब से तय वेतन का एक प्रतिशत — इनमें से सबसे छोटी राशि है। नए अधिनियम से इस पेज का हिसाब नहीं बदलता।

दो बातें मानकर न चलें, अपने साल के हिसाब से जाँचें: अगर आप दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के बाहर रहते हैं तो आपके शहर पर कौन-सा प्रतिशत लागू होता है, और HRA जोड़ने के बाद भी पुरानी व्यवस्था आपके लिए सही विकल्प है या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

HRA छूट की गणना कैसे होती है?

आपका छूट वाला HRA साल भर के हिसाब से निकाली गई तीन राशियों में से सबसे छोटी राशि होता है: (1) नियोक्ता द्वारा आपको वास्तव में दिया गया HRA; (2) आपके द्वारा वास्तव में चुकाया गया किराया घटा आपके वेतन का 10%; और (3) अगर आप दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या चेन्नई में रहते हैं तो वेतन का 50%, और कहीं और रहने पर वेतन का 40%। इन तीनों में जो सबसे छोटी है, वही आपकी छूट है — बाक़ी HRA पर टैक्स लगता है। यहाँ "वेतन" का मतलब है Basic वेतन और वह महँगाई भत्ता (DA) जो रिटायरमेंट लाभों में गिना जाता है, साथ में टर्नओवर के तय प्रतिशत के रूप में मिलने वाला कमीशन। इसमें बोनस, ओवरटाइम या दूसरे भत्ते शामिल नहीं होते। इस पेज का कैलकुलेटर तीनों राशियाँ साथ-साथ दिखाता है, ताकि आप देख सकें कि कौन-सी राशि आपकी छूट को नीचे रोक रही है।

HRA के लिए कौन-से शहर मेट्रो गिने जाते हैं?

31 मार्च 2026 तक की आय वाले रिटर्न के लिए सिर्फ़ चार: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई। इनके अलावा कोई शहर नहीं। बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, गुरुग्राम, नोएडा और बाक़ी हर शहर पर 40% की दर लगती है, चाहे वहाँ किराया कितना भी महँगा हो। HRA में लोग सबसे ज़्यादा यही ग़लती करते हैं — इस नियम की मेट्रो सूची बड़े शहरों की सूची जैसी नहीं है, और न ही यह वह शहर-वर्गीकरण है जिससे आपका नियोक्ता HRA तय करता है। 1 अप्रैल 2026 से यह नियम आयकर अधिनियम, 2025 में चला जाता है और शहरों की सूची वहाँ नए सिरे से लिखी जा रही है; अगर आप इन चार शहरों के बाहर रहते हैं, तो 40% मानने से पहले अपने नियोक्ता या सलाहकार से प्रतिशत की पुष्टि कर लें।

क्या नई टैक्स व्यवस्था में HRA क्लेम कर सकते हैं?

नहीं। HRA छूट सिर्फ़ पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलती है। आयकर विभाग साफ़ कहता है: पुरानी व्यवस्था में वेतनभोगियों के लिए HRA धारा 10(13A) के तहत छूट-प्राप्त है, और नई व्यवस्था में यह छूट उपलब्ध नहीं है। नई व्यवस्था डिफ़ॉल्ट है, इसलिए HRA क्लेम करने के लिए आपको उस साल के लिए ख़ुद पुरानी व्यवस्था चुननी होगी। इस सौदे का हिसाब लगाना फ़ायदेमंद है: नई व्यवस्था में स्लैब दरें कम हैं पर HRA हट जाता है, इसलिए मेट्रो में ऊँचा किराया देने वाला व्यक्ति आसानी से पुरानी व्यवस्था में बेहतर रह सकता है, जबकि बहुत कम या बिल्कुल किराया न देने वाला आम तौर पर नहीं। रिटर्न भरने का सॉफ़्टवेयर इसकी जाँच करता है — ITR के वैलिडेशन नियमों के अनुसार नई व्यवस्था चुनने पर धारा 10(13A) के तहत छूट वाला भत्ता शून्य होना चाहिए।

क्या माता-पिता को किराया देकर HRA क्लेम किया जा सकता है?

हाँ, अगर व्यवस्था असली है। घर वास्तव में आपके माता-पिता का होना चाहिए, आप वास्तव में उसमें रहते हों, और किराया वास्तव में चुकाते हों — बेहतर है हर महीने बैंक ट्रांसफ़र से, नकद नहीं, ताकि लेन-देन का रिकॉर्ड रहे। फिर आपके माता-पिता को वह किराया अपने रिटर्न में मकान संपत्ति से आय के रूप में दिखाना होगा और उस पर टैक्स देना होगा (किराये की आय पर 30% की मानक कटौती के बाद)। लिखित किरायानामा और किराये की रसीदें रखें। जो काम नहीं करता, वह है काग़ज़ी व्यवस्था जिसमें पैसा असल में न जाए, या ऐसे घर का किराया क्लेम करना जिसके आप सह-मालिक हैं। पति या पत्नी को दिए किराये पर भी HRA क्लेम नहीं कर सकते — ऐसी व्यवस्था बार-बार इस आधार पर नामंज़ूर हुई है कि पति-पत्नी से वैसे भी साथ रहने की अपेक्षा की जाती है।

क्या मुझे मकान-मालिक का PAN चाहिए?

हाँ, अगर साल में आपका चुकाया किराया ₹1,00,000 से ज़्यादा है। जब आप Form 12BB पर नियोक्ता को किराये की जानकारी देते हैं ताकि आपकी सैलरी से कम टैक्स कटे, तो सालाना किराया ₹1,00,000 पार होने पर आपको मकान-मालिक का नाम, पता और PAN देना होगा — यानी लगभग ₹8,334 महीना। अगर मकान-मालिक के पास सच में PAN नहीं है, तो उनसे इस बात की हस्ताक्षरित घोषणा उनके पते के साथ लेनी होगी। PAN की जानकारी न होना उन सबसे आम कारणों में से है जिनसे नियोक्ता Form 16 में HRA क्लेम को मान्यता देने से मना कर देता है, और तब आपको इसे अपने रिटर्न में क्लेम करके उसका बचाव करना पड़ता है।

क्या HRA और होम लोन की कटौती एक साथ क्लेम कर सकते हैं?

हाँ — ये अलग-अलग प्रावधान हैं और एक-दूसरे को रद्द नहीं करते। HRA छूट उस घर के किराये के लिए है जिसमें आप रहते हैं; होम लोन की कटौतियाँ आपकी अपनी संपत्ति पर ब्याज और मूलधन के लिए हैं। असल ज़िंदगी में आम मामला वह है जिसमें किसी का एक शहर में अपना फ़्लैट है (लोन चल रहा है) और वह दूसरे शहर में काम करता है जहाँ किराये पर रहता है। यह उस पर भी लागू है जिसकी अपनी संपत्ति सच में किराये पर दी गई है, और उस पर भी जिसका अपना घर काम की जगह से इतना दूर है कि वहाँ रहना संभव नहीं। टैक्स अधिकारी देखते हैं कि पूरी कहानी आपस में मेल खाती है या नहीं: अगर आप उसी बिल्डिंग के फ़्लैट का किराया क्लेम करते हैं जिसमें आपका अपना फ़्लैट है और आप उसी में रहते हैं, तो उस क्लेम पर सवाल उठने की उम्मीद रखें। दोनों तरफ़ के लिए किराये की रसीदें और लोन ब्याज प्रमाणपत्र संभालकर रखें।

अगर मेरी सैलरी में HRA है ही नहीं, तो?

तब धारा 10(13A) आप पर लागू नहीं होती, पर धारा 80GG हो सकती है। यह उन लोगों के लिए कटौती है जो किराया देते हैं पर जिन्हें HRA नहीं मिलता, और इसकी सीमा इनमें से सबसे कम राशि है: ₹5,000 महीना (₹60,000 सालाना), आपकी कुल आय का 25%, या चुकाया गया किराया घटा कुल आय का 10%। जिस अवधि में आपने HRA क्लेम किया हो उसके लिए इसे क्लेम नहीं कर सकते; अगर आपके, आपके पति/पत्नी या नाबालिग बच्चे के नाम उस शहर में घर है जहाँ आप काम करते हैं, तब भी नहीं; और इसके लिए भी पुरानी टैक्स व्यवस्था ज़रूरी है। यह आम HRA छूट से काफ़ी छोटी होती है, इसीलिए अगर आप किराये पर रहते हैं तो अपने सैलरी स्ट्रक्चर में HRA घटक माँगना फ़ायदेमंद है।

अगर मैं साल के कुछ ही हिस्से में किराये पर रहा तो?

हिसाब पूरे साल के लिए नहीं, सिर्फ़ उन महीनों के लिए लगाएँ जब आप वास्तव में किराये के घर में रहे। नियम संबंधित अवधि पर लागू होता है — इसलिए अगर आपने सात महीने किराया दिया, तो उन्हीं सात महीनों का वेतन और HRA, और उन महीनों में दिया गया किराया लें, और उन्हीं आँकड़ों पर तीन-तरफ़ा जाँच चलाएँ। अगर साल के बीच आपका वेतन, किराया या शहर बदला, तो हर बदलाव पर साल को बाँटें, हर हिस्से का अलग हिसाब लगाएँ, फिर छूट वाली राशियाँ जोड़ लें। इस पेज पर ऐसा करने के लिए इनपुट मोड को सालाना पर करें और एक बार में एक हिस्से का कुल योग दर्ज करें।

स्रोत

इस पेज पर लागू हर नियम आयकर विभाग के किसी आधिकारिक दस्तावेज़ से लिया गया है। नीचे का हर लिंक जाँचा गया है और जिस बात के लिए उसका हवाला दिया गया है, उसके लिए वही प्रमाण है।

  • Income Tax Department — FAQs on New Tax vs Old Tax Regime (आयकर विभाग — नई बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था पर FAQ) — साफ़ कहता है कि पुरानी व्यवस्था में HRA धारा 10(13A) के तहत छूट-प्राप्त है और नई व्यवस्था में यह छूट उपलब्ध नहीं है।
  • CBDT e-Filing — ITR-2 Validation Rules, AY 2026-27 (PDF) — विभाग की अपनी फ़ाइलिंग जाँचें तीन-तरफ़ा परीक्षण साफ़ लिखती हैं: वास्तव में मिला HRA, चुकाया गया वास्तविक किराया घटा वेतन + DA का 10%, और वेतन + DA का 40% या 50% — इनमें से सबसे कम।
  • CBDT e-Filing — ITR-1 Validation Rules, AY 2026-27 (PDF) — नई व्यवस्था चुनने पर धारा 10(13A) के तहत छूट वाले भत्ते को शून्य रखना अनिवार्य करते हैं, और जिस अवधि में HRA क्लेम हुआ हो उसके लिए धारा 80GG की कटौती रोकते हैं।

और टूल्स देखें

सभी 91 टूल्स देखें →